حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ أُمِّ غُرَابٍ، عَنِ امْرَأَةٍ، يُقَالُ لَهَا عَقِيلَةُ عَنْ سَلاَمَةَ بِنْتِ الْحُرِّ، أُخْتِ خَرَشَةَ قَالَتْ سَمِعْتُ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَقُولُ " يَأْتِي عَلَى النَّاسِ زَمَانٌ يَقُومُونَ سَاعَةً، لاَ يَجِدُونَ إِمَامًا يُصَلِّي بِهِمْ " .
It was narrated that Salamah bint Hurr, the sister of Kharashah, said:“I heard the Prophet (ﷺ) say: ‘A time will come when the people will stand for a long time and will not be able to find any Imam to lead them in prayer.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
DaifAl-Albani
DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
DaifShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।