सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 918

नंबर 918किताब 5, नंबर 116
حَدَّثَنَا أَبُو مُصْعَبٍ الْمَدِينِيُّ، أَحْمَدُ بْنُ أَبِي بَكْرٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمُهَيْمِنِ بْنُ عَبَّاسِ بْنِ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ السَّاعِدِيُّ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ سَلَّمَ تَسْلِيمَةً وَاحِدَةً تِلْقَاءَ وَجْهِهِ ‏.‏
‘Abdul-Muhaimin bin ‘Abbas bin Sahl bin Sa’d As-Sa’idi narrated from his father, from his grandfather, that the Messenger of Allah (ﷺ) said one Taslim to the front
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।