حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ أَبِي الضُّحَى، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يُكْثِرُ أَنْ يَقُولَ فِي رُكُوعِهِ وَسُجُودِهِ: " سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ. اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي " . يَتَأَوَّلُ الْقُرْآنَ .
It was narrated that ‘Aishah said:“The Messenger of Allah (ﷺ) often used to say when bowing and prostrating: ‘Subhanak Allahumma wa bi hamdika, Allahummaghfir li (Glory be to You, O Allah, and praise; O Allah forgive me),’ following the command given by the Qur’an.”[Surat An-Nasr]
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।