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सुनन इब्न माजा

नंबर 860

नंबर 860किताब 5, नंबर 58
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَهِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ عَيَّاشٍ، عَنْ صَالِحِ بْنِ كَيْسَانَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَرْفَعُ يَدَيْهِ فِي الصَّلاَةِ حَذْوَ مَنْكِبَيْهِ حِينَ يَفْتَتِحُ الصَّلاَةَ، وَحِينَ يَرْكَعُ، وَحِينَ يَسْجُدُ ‏.‏
It was narrated that Abu Hurairah said:“I saw the Messenger of Allah (ﷺ) raising his hands during prayer until they were parallel with his shoulders when he started to pray, when he bowed and when he prostrated.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।