सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 857

नंबर 857किताब 5, नंबर 55
حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ الْوَلِيدِ الْخَلاَّلُ الدِّمَشْقِيُّ، حَدَّثَنَا مَرْوَانُ بْنُ مُحَمَّدٍ، وَأَبُو مُسْهِرٍ قَالاَ حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ يَزِيدَ بْنِ صَالِحِ بْنِ صُبَيْحٍ الْمُرِّيُّ، حَدَّثَنَا طَلْحَةُ بْنُ عَمْرٍو، عَنْ عَطَاءٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ مَا حَسَدَتْكُمُ الْيَهُودُ عَلَى شَىْءٍ مَا حَسَدَتْكُمْ عَلَى آمِينَ فَأَكْثِرُوا مِنْ قَوْلِ آمِينَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn ‘Abbas that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“The Jews do not envy you for anything more than they envy you for the Salam and (saying) Amin, so say Amin a great deal.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Very DaifAl-Albani
  • Very DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।