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सुनन इब्न माजा

नंबर 855

नंबर 855किताब 5, नंबर 53
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، وَعَمَّارُ بْنُ خَالِدٍ الْوَاسِطِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ عَيَّاشٍ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَبْدِ الْجَبَّارِ بْنِ وَائِلٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ صَلَّيْتُ مَعَ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَلَمَّا قَالَ ‏{وَلاَ الضَّالِّينَ}‏ ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ آمِينَ ‏"‏ ‏.‏ فَسَمِعْنَاهَا مِنْهُ ‏.‏
It was narrated from ‘Abdul-Jabbar bin Wa’il that his father said:“I performed prayer with the Prophet (ﷺ) and when he said: ‘Nor of those who went astray’,[1:7] he said Amin and we heard that from him.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।