حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ عُمَارَةَ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ أَبِي مَعْمَرٍ، قَالَ قُلْتُ لِخَبَّابٍ بِأَىِّ شَىْءٍ كُنْتُمْ تَعْرِفُونَ قِرَاءَةَ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فِي الظُّهْرِ وَالْعَصْرِ قَالَ بِاضْطِرَابِ لِحْيَتِهِ .
It was narrated that Abu Ma’mar said:“I said to Khabbab: ‘How did you recognize that the Messenger of Allah (ﷺ) was reciting in the Zuhr and the ‘Asr?’ He said: ‘From the movement of his beard.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih BukhariZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।