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सुनन इब्न माजा

नंबर 822

नंबर 822किताब 5, नंबर 20
حَدَّثَنَا أَزْهَرُ بْنُ مَرْوَانَ، حَدَّثَنَا الْحَارِثُ بْنُ نَبْهَانَ، حَدَّثَنَا عَاصِمُ بْنُ بَهْدَلَةَ، عَنْ مُصْعَبِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَقْرَأُ فِي صَلاَةِ الْفَجْرِ يَوْمَ الْجُمُعَةِ ‏{الم * تَنْزِيلُ}‏ وَ ‏{هَلْ أَتَى عَلَى الإِنْسَانِ}‏
It was narrated from Mus’ab bin Sa’d that his father said:“For the Fajr prayer on Fridays, the Messenger of Allah (ﷺ) used to recite ‘Alif-Lam-Mim. The revelation...’ [32:1] and ‘Has there not been over man...’” [76:]
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • Sahih LighairihiMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।