حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ الْهَرَوِيُّ، إِبْرَاهِيمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ حَاتِمٍ أَنْبَأَنَا هُشَيْمٌ، أَنْبَأَنَا الْحَجَّاجُ بْنُ أَبِي زَيْنَبَ السُّلَمِيُّ، عَنْ أَبِي عُثْمَانَ النَّهْدِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ، قَالَ مَرَّ بِي النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ وَأَنَا وَاضِعٌ يَدِي الْيُسْرَى عَلَى الْيُمْنَى فَأَخَذَ بِيَدِي الْيُمْنَى فَوَضَعَهَا عَلَى الْيُسْرَى .
It was narrated that ‘Abdullah bin Mas’ud said:“The Prophet (ﷺ) passed by me, and I was putting my left hand on my right. He took hold of my right hand and put it on my left.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Isnaad HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।