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सुनन इब्न माजा

नंबर 806

नंबर 806किताब 5, नंबर 4
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ عِمْرَانَ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، حَدَّثَنَا حَارِثَةُ بْنُ أَبِي الرِّجَالِ، عَنْ عَمْرَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَانَ إِذَا افْتَتَحَ الصَّلاَةَ قَالَ ‏ "‏ سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ تَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَى جَدُّكَ وَلاَ إِلَهَ غَيْرُكَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Aishah that when the Prophet (ﷺ) started Salat he would say:“Subhanak Allahumma wa bi hamdika, wa tabarakas- muka wa ta’ala jadduka, wa la ilaha ghayruk (Glory and praise is to You, O Allah, blessed is Your Name and exalted is Your majesty, none has the right to be worshipped but You).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।