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सुनन इब्न माजा

नंबर 803

नंबर 803किताब 5, नंबर 1
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ الطَّنَافِسِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، حَدَّثَنِي عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَمْرِو بْنِ عَطَاءٍ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا حُمَيْدٍ السَّاعِدِيَّ، يَقُولُ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ إِذَا قَامَ إِلَى الصَّلَاةِ اسْتَقْبَلَ الْقِبْلَةَ وَرَفَعَ يَدَيْهِ وَقَالَ ‏ "‏ اللَّهُ أَكْبَرُ ‏"‏ ‏.‏
Muhammad bin ‘Amr bin ‘Ata’ said:“I heard Abu Humaid As-Sa’idi say: ‘When the Messenger of Allah (ﷺ) stood up for prayer, he would face the prayer direction, raise his hands, and say: “Allahu Akbar (Allah is Most Great).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।