حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا حَاتِمُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، وَعِيسَى بْنُ يُونُسَ، قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سُلَيْمَانَ الْكِرْمَانِيُّ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا أُمَامَةَ بْنَ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ، يَقُولُ قَالَ سَهْلُ بْنُ حُنَيْفٍ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " مَنْ تَطَهَّرَ فِي بَيْتِهِ، ثُمَّ أَتَى مَسْجِدَ قُبَاءٍ، فَصَلَّى فِيهِ صَلاَةً، كَانَ لَهُ كَأَجْرِ عُمْرَةٍ " .
(Sahl) bin Hunaif said:“The Messenger of Allah (ﷺ) said: ‘Whoever purifies himself in his house, then comes to the Quba’ Mosque and offers one prayer therein, will have a reward like that for ‘Umrah.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
HasanShuaib Al Arnaut
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।