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सुनन इब्न माजा

नंबर 1400

नंबर 1400किताब 5, नंबर 598
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ خَلاَّدٍ الْبَاهِلِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ، حَدَّثَنَا شَرِيكٌ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُصْمٍ أَبِي عُلْوَانَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ أُمِرَ نَبِيُّكُمْ ـ صلى الله عليه وسلم ـ بِخَمْسِينَ صَلاَةً فَنَازَلَ رَبَّكُمْ أَنْ يَجْعَلَهَا خَمْسَ صَلَوَاتٍ ‏.‏
It was narrated that Ibn ‘Abbas said:“Your Prophet (ﷺ) was enjoined to do fifty prayers but he returned to your Lord to make (i.e., reduce) them to five prayers.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • Sahih LighairihiMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।