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सुनन इब्न माजा

नंबर 1361

नंबर 1361किताब 5, नंबर 559
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدِ بْنِ مَيْمُونٍ أَبُو عُبَيْدٍ الْمَدِينِيُّ، حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جَعْفَرٍ، عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَامِرٍ الشَّعْبِيِّ، قَالَ سَأَلْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَبَّاسٍ وَعَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ عَنْ صَلاَةِ، رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ بِاللَّيْلِ فَقَالاَ ثَلاَثَ عَشْرَةَ رَكْعَةً مِنْهَا ثَمَانٍ وَيُوتِرُ بِثَلاَثٍ وَرَكْعَتَيْنِ بَعْدَ الْفَجْرِ ‏.‏
It was narrated that ‘Amir Ash-Sha’bi said:“I asked ‘Abdullah bin ‘Abbas and ‘Abdullah bin ‘Umar about the Prophet’s prayer at night. They said: ‘(He prayed) thirteen Rak’ah, including eight, and three for Witr, and two Rak’ah after the Fajr.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।