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सुनन इब्न माजा

नंबर 1339

नंबर 1339किताब 5, नंबर 537
حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ مُعَاذٍ الضَّرِيرُ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ جَعْفَرٍ الْمَدَنِيُّ، حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ بْنِ مُجَمِّعٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ إِنَّ مِنْ أَحْسَنِ النَّاسِ صَوْتًا بِالْقُرْآنِ، الَّذِي إِذَا سَمِعْتُمُوهُ يَقْرَأُ، حَسِبْتُمُوهُ يَخْشَى اللَّهَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Jabir said:“The Messenger of Allah (ﷺ) said: ‘Among the people who recite the Qur’an with the most beautiful voices is the man who, when you hear him, you think that he fears Allah.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।