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सुनन इब्न माजा

नंबर 1320

नंबर 1320किताब 5, नंबर 518
حَدَّثَنَا سَهْلُ بْنُ أَبِي سَهْلٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، وَعَنِ ابْنِ أَبِي لَبِيدٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، وَعَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ طَاوُسٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ سُئِلَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ عَنْ صَلاَةِ اللَّيْلِ فَقَالَ ‏ "‏ يُصَلِّي مَثْنَى مَثْنَى. فَإِذَا خَافَ الصُّبْحَ أَوْتَرَ بِرَكْعَةٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn ‘Umar said:“The Prophet (ﷺ) was asked about the night prayer. He said: ‘Pray two by two, and if you fear that dawn is coming, then perform Witr with one Rak’ah.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।