حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنِ ابْنِ سِيرِينَ، عَنْ أُمِّ عَطِيَّةَ، قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " أَخْرِجُوا الْعَوَاتِقَ وَذَوَاتِ الْخُدُورِ لِيَشْهَدْنَ الْعِيدَ وَدَعْوَةَ الْمُسْلِمِينَ . وَلِيَجْتَنِبَنَّ الْحُيَّضُ مُصَلَّى النَّاسِ " .
It was narrated that Umm ‘Atiyyah said:“The Messenger of Allah (ﷺ) said: ‘Bring out the women who have attained puberty and those who are in seclusion so that they may attend the ‘Eid prayer and (join in) the supplication of the Muslims. But let the women who are menstruating avoid the prayer place.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।