حَدَّثَنَا أَبُو مَسْعُودٍ، مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُبَيْدِ بْنِ عَقِيلٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ خَالِدِ بْنِ عَثْمَةَ، حَدَّثَنَا كَثِيرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ عَوْفٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَبَّرَ فِي الْعِيدَيْنِ سَبْعًا فِي الأُولَى وَخَمْسًا فِي الآخِرَةِ .
Kathir bin ‘Abdullah bin ‘Amr bin ‘Awf narrated, from his father, from his grandfather, that the Messenger of Allah (ﷺ) said the Takbir in the ‘Eid prayers, seven times in the first Rak’ah and five times in the second
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
Sahih LighairihiMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Hasan LighairihiShuaib Al Arnaut
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।