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सुनन इब्न माजा

नंबर 1264

नंबर 1264किताब 5, नंबर 462
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنِ الأَسْوَدِ بْنِ قَيْسٍ، عَنْ ثَعْلَبَةَ بْنِ عِبَادٍ، عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدُبٍ، قَالَ صَلَّى بِنَا رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فِي الْكُسُوفِ فَلاَ نَسْمَعُ لَهُ صَوْتًا ‏.‏
It was narrated that Samurah bin Jundab said:“The Messenger of Allah (ﷺ) led us in the eclipse prayer, and we did not hear his voice.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Hasan LighairihiShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।