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सुनन इब्न माजा

नंबर 1257

नंबर 1257किताब 5, नंबर 455
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ هِلاَلِ بْنِ يِسَافٍ، عَنْ أَبِي الْمُثَنَّى، عَنْ أَبِي أُبَىٍّ ابْنِ امْرَأَةِ، عُبَادَةَ بْنِ الصَّامِتِ يَعْنِي عَنْ عُبَادَةَ بْنِ الصَّامِتِ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ سَيَكُونُ أُمَرَاءُ تَشْغَلُهُمْ أَشْيَاءُ يُؤَخِّرُونَ الصَّلاَةَ عَنْ وَقْتِهَا فَاجْعَلُوا صَلاَتَكُمْ مَعَهُمْ تَطَوُّعًا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Ubadah bin Samit that the Prophet (ﷺ) said:“There will be leaders who will be distracted by matters and they will delay the prayer until after its proper time. So make your prayer with them voluntary.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।