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सुनन इब्न माजा

नंबर 1255

नंबर 1255किताब 5, नंबर 453
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، أَنْبَأَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ عَيَّاشٍ، عَنْ عَاصِمٍ، عَنْ زِرٍّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ لَعَلَّكُمْ سَتُدْرِكُونَ أَقْوَامًا يُصَلُّونَ الصَّلاَةَ لِغَيْرِ وَقْتِهَا. فَإِنْ أَدْرَكْتُمُوهُمْ فَصَلُّوا فِي بُيُوتِكُمْ لِلْوَقْتِ الَّذِي تَعْرِفُونَ. ثُمَّ صَلُّوا مَعَهُمْ وَاجْعَلُوهَا سُبْحَةً ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that ‘Abdullah bin Mas’ud said:“The Messenger of Allah (ﷺ) said: ‘You may come across people who offer a prayer at the wrong time. If you meet them, then perform prayer in your houses at the time that you know, then pray with them and make that voluntary.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Hasan SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।