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सुनन इब्न माजा

नंबर 1206

नंबर 1206किताब 5, नंबर 404
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ، وَأَبُو بَكْرٍ ابْنَا أَبِي شَيْبَةَ وَهِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ قَالُوا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنِ ابْنِ بُحَيْنَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ صَلَّى صَلاَةً أَظُنُّ أَنَّهَا الظُّهْرُ (العَصْرُ) فَلَمَّا كَانَ فِي الثَّانِيَةِ قَامَ قَبْلَ أَنْ يَجْلِسَ فَلَمَّا كَانَ قَبْلَ أَنْ يُسَلِّمَ سَجَدَ سَجْدَتَيْنِ ‏.‏
It was narrated from Ibn Buhainah:“The Prophet (ﷺ) offered prayer, I think it was the ‘Asr, and in the second Rak’ah he stood up before he sat. Before he said the Salam, he prostrated twice.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।