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सुनन इब्न माजा

नंबर 1183

नंबर 1183किताब 5, नंबर 381
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ، حَدَّثَنَا سَهْلُ بْنُ يُوسُفَ، حَدَّثَنَا حُمَيْدٌ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ سُئِلَ عَنِ الْقُنُوتِ، فِي صَلاَةِ الصُّبْحِ فَقَالَ كُنَّا نَقْنُتُ قَبْلَ الرُّكُوعِ وَبَعْدَهُ ‏.‏
It was narrated that Anas bin Malik said:He was asked about Qunut in the Subh prayer, and he said: “We used to recite Qunut before Ruku’ and afterwards.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।