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सुनन इब्न माजा

नंबर 1171

नंबर 1171किताब 5, नंबर 369
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو حَفْصٍ الأَبَّارُ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ طَلْحَةَ، وَزُبَيْدٍ، عَنْ ذَرٍّ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبْزَى، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أُبَىِّ بْنِ كَعْبٍ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يُوتِرُ بِـ ‏{سَبِّحِ اسْمَ رَبِّكَ الأَعْلَى}‏ وَ ‏{قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ}‏ وَ ‏{قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ‏}‏ ‏.‏
It was narrated that Ubayy bin Ka’b said:“The Messenger of Allah (ﷺ) used to perform Witr and recite: ‘Glorify the Name of your Lord the Most High.’, [Al-A’la (87)] ‘Say: O you disbelievers!” [Al-Kafirun (109)] and ‘Say: Allah is One.”. [Al-Ikhlas]
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।