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सुनन इब्न माजा

नंबर 1158

नंबर 1158किताब 5, नंबर 356
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، وَزَيْدُ بْنُ أَخْزَمَ، وَمُحَمَّدُ بْنُ مَعْمَرٍ، قَالُوا حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ دَاوُدَ الْكُوفِيُّ، حَدَّثَنَا قَيْسُ بْنُ الرَّبِيعِ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَقِيقٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ إِذَا فَاتَتْهُ الأَرْبَعُ قَبْلَ الظُّهْرِ صَلاَّهَا بَعْدَ الرَّكْعَتَيْنِ بَعْدَ الظُّهْرِ.‏ قَالَ أَبُو عَبْدِ اللَّهِ لَمْ يُحَدِّثْ بِهِ إِلاَّ قَيْسٌ عَنْ شُعْبَةَ. ‏‏
It was narrated that ‘Aishah said:“If the Messenger of Allah (ﷺ) missed the four Rak’ah before the Zuhr, he would perform them after the two Rak’ah which come after the Zuhr.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।