सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 1152

नंबर 1152किताब 5, नंबर 350
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنْ عَاصِمٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَرْجِسَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ رَأَى رَجُلاً يُصَلِّي الرَّكْعَتَيْنِ قَبْلَ صَلاَةِ الْغَدَاةِ وَهُوَ فِي الصَّلاَةِ فَلَمَّا صَلَّى قَالَ لَهُ: ‏ "‏ بِأَىِّ صَلاَتَيْكَ اعْتَدَدْتَ؟ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Abdullah bin Sarjis that the Messenger of Allah (ﷺ) saw a man performing the two Rak’ah before the morning prayer while he himself was performing prayer. When he had finished praying he said to him:“Which of your two prayers did you intend to be counted (i.e., accepted)?”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।