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सुनन इब्न माजा

नंबर 1149

नंबर 1149किताब 5, नंबर 347
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ سِنَانٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبَادَةَ الْوَاسِطِيَّانِ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ رَمَقْتُ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ شَهْرًا فَكَانَ يَقْرَأُ فِي الرَّكْعَتَيْنِ قَبْلَ الْفَجْرِ ‏{قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ}‏ وَ ‏{قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ}‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn ‘Umar said:“I watched the Prophet (ﷺ) for a month, and in the two Rak’ah before Fajr he used to recite: “Say: O you disbelievers!” [Al-Kafirun (109)] and “Say: Allah is One.” [Al- Ikhlas]
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।