सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 1141

नंबर 1141किताब 5, नंबर 339
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، أَنْبَأَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ، عَنِ الْمُسَيَّبِ بْنِ رَافِعٍ، عَنْ عَنْبَسَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ بِنْتِ أَبِي سُفْيَانَ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ مَنْ صَلَّى فِي يَوْمٍ وَلَيْلَةٍ ثِنْتَىْ عَشْرَةَ رَكْعَةً، بُنِيَ لَهُ بَيْتٌ فِي الْجَنَّةِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Umm Habibah bint Abi Sufyan that the Prophet (ﷺ) said:“Whoever performs twelve Rak’ah (of Sunnah) during the day and night, a house will be built for him in Paradise.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।