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सुनन इब्न माजा

नंबर 1100

नंबर 1100किताब 5, नंबर 298
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، حَدَّثَنَا يَعْلَى بْنُ الْحَارِثِ، قَالَ سَمِعْتُ إِيَاسَ بْنَ سَلَمَةَ بْنِ الأَكْوَعِ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كُنَّا نُصَلِّي مَعَ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ الْجُمُعَةَ ثُمَّ نَرْجِعُ، فَلاَ نَرَى لِلْحِيطَانِ فَيْئًا نَسْتَظِلُّ بِهِ ‏.‏
Iyas bin Salamah bin Akwa’ narrated that his father said:“We used to perform Friday (prayer) with the Prophet (ﷺ), then we would return, and we would not see any shadow from the walls in which we could seek shade.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।