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सुनन इब्न माजा

नंबर 1098

नंबर 1098किताब 5, नंबर 296
حَدَّثَنَا عَمَّارُ بْنُ خَالِدٍ الْوَاسِطِيُّ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ غُرَابٍ، عَنْ صَالِحِ بْنِ أَبِي الأَخْضَرِ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُبَيْدِ بْنِ السَّبَّاقِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ إِنَّ هَذَا يَوْمُ عِيدٍ، جَعَلَهُ اللَّهُ لِلْمُسْلِمِينَ. فَمَنْ جَاءَ إِلَى الْجُمُعَةِ فَلْيَغْتَسِلْ. وَإِنْ كَانَ طِيبٌ فَلْيَمَسَّ مِنْهُ. وَعَلَيْكُمْ بِالسِّوَاكِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn ‘Abbas said:“The Messenger of Allah (ﷺ) said: ‘This day is an ‘Eid (festival) which Allah has ordained for the Muslims. Whoever comes to Friday (prayer), let him take a bath and if he has perfume then let him put some on. And upon you (I urge to use) is the tooth stick.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।