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सुनन इब्न माजा

नंबर 1077

नंबर 1077किताब 5, नंबर 275
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، وَعَبْدُ الأَعْلَى، قَالاَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ أَنَسٍ قَالَ: خَرَجْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ مِنَ الْمَدِينَةِ إِلَى مَكَّةَ. فَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ رَكْعَتَيْنِ، حَتَّى رَجَعْنَا ‏.‏ قُلْتُ: كَمْ أَقَامَ بِمَكَّةَ؟ قَالَ: عَشْرًا ‏.‏
Yahya bin Abu Ishaq narrated that Anas said:“We went out with the Messenger of Allah (ﷺ) from Al-Madinah to Makkah, during which time we shortened our prayer to two Rak’ah, until we came back.” I asked: “How long did he stay in Makkah?” He said: “Ten (days).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।