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सुनन इब्न माजा

नंबर 1033

नंबर 1033किताब 5, नंबर 231
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ حَبِيبٍ، حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْمُفَضَّلِ، عَنْ غَالِبٍ الْقَطَّانِ، عَنْ بَكْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ كُنَّا نُصَلِّي مَعَ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فِي شِدَّةِ الْحَرِّ فَإِذَا لَمْ يَقْدِرْ أَحَدُنَا أَنْ يُمَكِّنَ جَبْهَتَهُ بَسَطَ ثَوْبَهُ فَسَجَدَ عَلَيْهِ ‏.‏
It was narrated that Anas bin Malik said:“We used to perform prayer with the Prophet (ﷺ) when it was very hot. When one of us could not place his forehead firmly on the ground, he would spread his garment and prostrate on it.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।