حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالاَ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، حَدَّثَنَا الأَوْزَاعِيُّ، حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ أَبِي كَثِيرٍ، حَدَّثَنِي أَبُو سَلَمَةَ، قَالَ حَدَّثَنِي مُعَيْقِيبٌ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فِي مَسْحِ الْحَصَى فِي الصَّلاَةِ " إِنْ كُنْتَ فَاعِلاً فَمَرَّةً وَاحِدَةً " .
It was narrated that Mu’aiqib said:“The Messenger of Allah (ﷺ) said, concerning smoothing the pebbles during prayer: ‘If you must do that, then do it only once.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।