حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ أَخْزَمَ أَبُو طَالِبٍ، حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ، وَأَبُو قُتَيْبَةَ قَالاَ حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ مُسْلِمٍ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ قُرَّةَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كُنَّا نُنْهَى أَنْ نَصُفَّ، بَيْنَ السَّوَارِي عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ وَنُطْرَدُ عَنْهَا طَرْدًا .
It was narrated from Mu’awiyah bin Qurrah that his father said:“We were forbidden to form a row between two pillars at the time of the Messenger of Allah (ﷺ), and we would be repelled from them forcefully.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
Hasan SahihAl-Albani
Hasan SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
HasanShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।