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सुनन इब्न माजा

नंबर 798

नंबर 798किताब 4, नंबर 64
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ عَيَّاشٍ، عَنْ عُمَارَةَ بْنِ غَزِيَّةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُ ‏ "‏ مَنْ صَلَّى فِي مَسْجِدٍ جَمَاعَةً أَرْبَعِينَ لَيْلَةً لاَ تَفُوتُهُ الرَّكْعَةُ الأُولَى مِنْ صَلاَةِ الْعِشَاءِ كَتَبَ اللَّهُ لَهُ بِهَا عِتْقًا مِنَ النَّارِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Umar bin Khattab that:The Prophet used to say: "Whoever performs prayer in congregation at the mosque for forty nights, never missing the first Rak'ah of the 'Isha' prayer, Allah will thereby decree for him salvation from the Fire
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • MawduAl-Albani
  • HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book On The Mosques And The Congregations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।