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सुनन इब्न माजा

नंबर 789

नंबर 789किताब 4, नंबर 55
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عُمَرَ، رُسْتَهْ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ صَلاَةُ الرَّجُلِ فِي جَمَاعَةٍ تَفْضُلُ عَلَى صَلاَةِ الرَّجُلِ وَحْدَهُ بِسَبْعٍ وَعِشْرِينَ دَرَجَةً ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Umar said:"The Messenger of Allah said: 'The prayer of a man in congregation is twenty-seven levels more virtuous than a man's prayer on his own
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book On The Mosques And The Congregations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।