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सुनन इब्न माजा

नंबर 769

नंबर 769किताब 4, नंबर 35
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ الْمُزَنِيِّ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ صَلُّوا فِي مَرَابِضِ الْغَنَمِ وَلاَ تُصَلُّوا فِي أَعْطَانِ الإِبِلِ فَإِنَّهَا خُلِقَتْ مِنَ الشَّيَاطِينِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that 'Abdullah bin Mughaffal Al-Muzani said:"The Prophet said: 'Perform prayer in the sheep's resting-places and do not perform prayer in the camels' resting-places, for they were created from the devils
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • HasanShuaib Al Arnaut
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book On The Mosques And The Congregations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।