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सुनन इब्न माजा

नंबर 759

नंबर 759किताब 4, नंबर 25
حَدَّثَنَا رِزْقُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى، حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِسْحَاقَ الْحَضْرَمِيُّ، حَدَّثَنَا زَائِدَةُ بْنُ قُدَامَةَ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ أَمَرَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ أَنْ تُتَّخَذَ الْمَسَاجِدُ فِي الدُّورِ وَأَنْ تُطَهَّرَ وَتُطَيَّبَ ‏.‏
It was narrated from 'Aishah that:The Messenger of Allah commanded that places of prayer be established in villages, and that they be purified and perfumed
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book On The Mosques And The Congregations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।