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सुनन इब्न माजा

नंबर 4340

नंबर 4340किताब 37, नंबर 241
حَدَّثَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ، حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ بُرَيْدِ بْنِ أَبِي مَرْيَمَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ مَنْ سَأَلَ الْجَنَّةَ ثَلاَثَ مَرَّاتٍ قَالَتِ الْجَنَّةُ اللَّهُمَّ أَدْخِلْهُ الْجَنَّةَ وَمَنِ اسْتَجَارَ مِنَ النَّارِ ثَلاَثَ مَرَّاتٍ قَالَتِ النَّارُ اللَّهُمَّ أَجِرْهُ مِنَ النَّارِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Anas bin Malik that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Whoever asks for Paradise, three times, Paradise will say: “O Allah, admit him to Paradise.” And whoever asked to be saved from Hell, three times, Hell will say: “O Allah, save him from Hell.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।