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सुनन इब्न माजा

नंबर 4335

नंबर 4335किताब 37, नंबर 236
حَدَّثَنَا أَبُو عُمَرَ الضَّرِيرُ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عُثْمَانَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏"‏ إِنَّ فِي الْجَنَّةِ شَجَرَةً يَسِيرُ الرَّاكِبُ فِي ظِلِّهَا مِائَةَ سَنَةٍ لاَ يَقْطَعُهَا ‏"‏ ‏.‏ وَاقْرَءُوا إِنْ شِئْتُمْ ‏{وَظِلٍّ مَمْدُودٍ * وَمَاءٍ مَسْكُوبٍ ‏)‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“In Paradise there is a tree under whose shade a rider could travel for one hundred years and never leave it.” "Recite, if you wish: 'And in shade long-extended (56:)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Hasan SahihShuaib Al Arnaut
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।