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सुनन इब्न माजा

नंबर 4315

नंबर 4315किताब 37, नंबर 216
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ ذَكْوَانَ، عَنْ أَبِي رَجَاءٍ الْعُطَارِدِيِّ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ الْحُصَيْنِ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ لَيَخْرُجَنَّ قَوْمٌ مِنَ النَّارِ بِشَفَاعَتِي يُسَمَّوْنَ الْجَهَنَّمِيِّينَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Imran bin Husain that the Prophet (ﷺ) said:“Some people will be brought forth from Hell by my intercession, who will be called Al-Jahannamiyyin (those who came out of Hell).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।