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सुनन इब्न माजा

नंबर 4313

नंबर 4313किताब 37, नंबर 214
حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَرْوَانَ، حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا عَنْبَسَةُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ عِلاَقِ بْنِ أَبِي مُسْلِمٍ، عَنْ أَبَانَ بْنِ عُثْمَانَ، عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ يَشْفَعُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ثَلاَثَةٌ الأَنْبِيَاءُ ثُمَّ الْعُلَمَاءُ ثُمَّ الشُّهَدَاءُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Uthman bin ‘Affan that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Three will intercede on the Day of Resurrection: The Prophets, then the scholars, then the martyrs.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • MawduAl-Albani
  • MawduMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।