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सुनन इब्न माजा

नंबर 4298

नंबर 4298किताब 37, नंबर 199
حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ الْوَلِيدِ الدِّمَشْقِيُّ، حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ هَاشِمٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ، عَنْ عَبْدِ رَبِّهِ بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏"‏ لاَ يَدْخُلُ النَّارَ إِلاَّ شَقِيٌّ ‏"‏ ‏.‏ قِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ وَمَنِ الشَّقِيُّ قَالَ ‏"‏ مَنْ لَمْ يَعْمَلْ لِلَّهِ بِطَاعَةٍ وَلَمْ يَتْرُكْ لَهُ مَعْصِيَةً ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Hurairah said:“The Messenger of Allah (ﷺ) said: “No one will enter Hell except one who is doomed.” It was said: “O Messenger of Allah, who is the one who is doomed?” He said: “The one who never does any act of obedience (towards Allah) and who never omitted any act of sin.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।