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सुनन इब्न माजा

नंबर 4256

नंबर 4256किताब 37, नंबर 157
قَالَ الزُّهْرِيُّ وَحَدَّثَنِي حُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏:‏ ‏ "‏ دَخَلَتِ امْرَأَةٌ النَّارَ فِي هِرَّةٍ رَبَطَتْهَا فَلاَ هِيَ أَطْعَمَتْهَا وَلاَ هِيَ أَرْسَلَتْهَا تَأْكُلُ مِنْ خَشَاشِ الأَرْضِ حَتَّى مَاتَتْ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ الزُّهْرِيُّ ‏:‏ لِئَلاَّ يَتَّكِلَ رَجُلٌ وَلاَ يَيْأَسَ رَجُلٌ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“A woman entered Hell because of a cat which she tied up and did not feed, or let it loose to eat of the vermin of the earth, until it died.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।