सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 4250

नंबर 4250किताब 37, नंबर 151
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ سَعِيدٍ الدَّارِمِيُّ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الرَّقَاشِيُّ، حَدَّثَنَا وُهَيْبُ بْنُ خَالِدٍ، حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ عَبْدِ الْكَرِيمِ، عَنْ أَبِي عُبَيْدَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏:‏ ‏ "‏ التَّائِبُ مِنَ الذَّنْبِ كَمَنْ لاَ ذَنْبَ لَهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu ‘Ubadah bin ‘Abdullah, that his father said:“The Messenger of Allah (ﷺ) said: ‘The one who repents from sin is like one who did not sin.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sanad DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।