حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ رُمْحٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، عَنِ الْمَاضِي بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ سُلَيْمَانَ، عَنِ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ الْخَوْلاَنِيِّ، عَنْ أَبِي ذَرٍّ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " لاَ عَقْلَ كَالتَّدْبِيرِ وَلاَ وَرَعَ كَالْكَفِّ وَلاَ حَسَبَ كَحُسْنِ الْخُلُقِ " .
It was narrated from Abu Dharr that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“There is no wisdom like reflection, and no honor like good manners.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
DaifAl-Albani
DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
DaifShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।