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सुनन इब्न माजा

नंबर 4209

नंबर 4209किताब 37, नंबर 110
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَكِيمٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ، قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ لاَ حَسَدَ إِلاَّ فِي اثْنَتَيْنِ رَجُلٌ آتَاهُ اللَّهُ الْقُرْآنَ فَهُوَ يَقُومُ بِهِ آنَاءَ اللَّيْلِ وَآنَاءَ النَّهَارِ وَرَجُلٌ آتَاهُ اللَّهُ مَالاً فَهُوَ يُنْفِقُهُ آنَاءَ اللَّيْلِ وَآنَاءَ النَّهَارِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Salim that his father said:“The Messenger of Allah (ﷺ) said: ‘There is no envy except in two cases. A man to whom Allah has given (knowledge of) the Qur’an, so he recites it night and day, and a man to whom Allah has given wealth, so he spends it night and day.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।