حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ إِسْحَاقَ، حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْوَهَّابِ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ سَلَمَةَ بْنِ كُهَيْلٍ، عَنْ جُنْدَبٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " مَنْ يُرَاءِ يُرَاءِ اللَّهُ بِهِ وَمَنْ يُسَمِّعْ يُسَمِّعِ اللَّهُ بِهِ " .
It was narrated from Jundab that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Whoever wants to be heard of, Allah will make him heard of, and whoever wants to be seen, Allah will show him (i.e., expose his real motives).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।