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सुनन इब्न माजा

नंबर 4183

नंबर 4183किताब 37, नंबर 84
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ رِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَمْرٍو أَبِي مَسْعُودٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ إِنَّ مِمَّا أَدْرَكَ النَّاسُ مِنْ كَلاَمِ النُّبُوَّةِ الأُولَى إِذَا لَمْ تَسْتَحِي فَاصْنَعْ مَا شِئْتَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Uqbah bin ‘Amr, Abu Mas’ud, that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Among the words that people learned from the earlier Prophets are: ‘If you feel no shame, then do as you wish.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।