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सुनन इब्न माजा

नंबर 4157

नंबर 4157किताब 37, नंबर 58
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ عَبَّاسٍ الْجُرَيْرِيِّ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا عُثْمَانَ، يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّهُمْ أَصَابَهُمْ جُوعٌ وَهُمْ سَبْعَةٌ قَالَ فَأَعْطَانِي النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ سَبْعَ تَمَرَاتٍ لِكُلِّ إِنْسَانٍ تَمْرَةٌ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that they suffered from hunger and they were seven. He said:“Then the Prophet (ﷺ) gave me seven dates, one date for each man.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।